Rahat indori (राहत इंदौरी) Ghazal Collection

       GHAZALS OF RAHAT INDORI SAHAB



Born(जन्म)
1 जनवरी 1950 (आयु 68)
इंदौरमध्य प्रदेशभारत

About
एक भारतीय उर्दू शायर और हिंदी फिल्मों के गीतकार हैं। वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक भी रह चुके हैं।

प्रमुख ग़ज़लें

1 - अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे

2- अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है

3 - अपने होने का हम इस तरह पता देते थे

4 - आँख प्यासी है कोई मन्ज़र दे

5- इन्तेज़मात नये सिरे से सम्भाले जायें|

6 - उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो

7- उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर मंतर सब

8-कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं

9- किसी आहू के लिये दूर तलक मत जाना

10- चेहरों की धूप आँखों की गहराई ले गया|

11- तू शब्दों का दास रे जोगी

12- दिल जलाया तो अंजाम क्या हुआ मेरा

13- दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं

14- दोस्ती जब किसी से की जाये|

15-तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची

16-पेशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिले|

17- जो मंसबो के पुजारी पेहेन के आते हैं।

18-बीमार को मर्ज़ की दवा देनी चाहिए

19-मस्जिदों के सहन तक जाना बहुत दुश्वार था|

20-मेरे कारोबार में सबने बड़ी इम्दाद की

21-ये सानेहा तो किसी दिन गुजरने वाला था

22-लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं

23-शहरों-शहरों गाँव का आँगन याद आया

24-सफ़र की हद है वहाँ तक कि कुछ निशान रहे|

25-समन्दरों में मुआफिक हवा चलाता है

26-सारी बस्ती क़दमों में है, ये भी इक फ़नकारी है

27-हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|

28- बीमार को मर्ज़ की दवा देनी चाहिए!

29- मेरे खुलुस की गेहराई से नही मिलते ! 




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