मैं जो हूँ, ‘जॉन एलिया’ हूँ जनाब ( mai jo hoon jaun Elia hoon janaab ) - jaun elia

मुझ को आप अपना आप दीजियेगा
और कुछ भी न मुझ से लीजियेगा

आप बेमिस्ल,1 बेमिसाल2 हूँ मैं
मुझ सिवा3 आप किस से रीझियेगा

आप जो हैं अज़ल4 से ही बेनाम
नाम मेरा कभी तो लीजियेगा

आप बस मुझ में ही तो हैं, सो आप
मेरा बेहद ख़्याल कीजियेगा

है अगर वाक़ई शराब हराम5
आप होंठों से मेरे पीजियेगा

इन्तज़ारी हूँ अपना मैं दिन-रात
अब मुझे आप भेज दीजियेगा

आप मुझ को बहुत पसन्द आयीं
आप मेरी क़मीस सीजियेगा

दिल के रिश्ते हैं ‘जॉन’ झूठ कि सच
ये मुअम्मा6 कभी न बूझियेगा

है मिरे जिस्मो-जां का माज़ी7 क्या
मुझ से बस ये कभी न पूछियेगा

मुझ से मेरी कमाई का सरे-शाम
पाई-पाई हिसाब लीजियेगा

ज़िन्दगी क्या है इक हुनर करना
सो, क़रीने8 से ज़ह्र पीजियेगा

मैं जो हूँ, ‘जॉन एलिया’ हूँ जनाब
इस का बेहद लिहाज़ कीजियेगा

~ जॉन एलिया ( jaun elia )

Ghazal taken from book - Main hoon jaun elia

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1. अनुपम
2. अतुल्य
3. अतिरिक्त
4. अनादि काल
5. वर्जित
6. पहेली
7. अतीत
8. शिष्टता।

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