Know The poet - Tehzeeb Hafi

BEST SHAYARI COLLECTION OF TEHZEEB HAFI 

KNOW THE POET - TEHZEEB HAFI

नमस्कार दोस्तों know the poet में आज हम बात करेंगें  नई नस्ल के मशहूर पाकिस्तानी शायर तहज़ीब हाफ़ी के बारे में , तहज़ीब हाफी आज के दौर के सबसे मशहूर युवा शायरों में से एक हैं उनके दुनिया भर में जहाँ जहाँ शायरी सुनी और समझी जाती है वहां हज़ारो चाहने वाले हैं इनका एक सँग्रह सन 2012 में  छप चुका है, जिसका नाम था -- दुनिया ज़ाद।

तो आइए दोस्तों पढ़ते हैं तहज़ीब हाफी की कुछ बेहतरीन शायरी ,



➡️➡️ Tehzeeb Hafi 30 Ghazal Collection ⬅️⬅️



⬇️⬇️Tehzeeb hafi's 10 famous ghazals ⤵️⤵️


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1.


इक तिरा हिज्र दाइमी है मुझे

वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे


एक साया मिरे तआक़ुब में

एक आवाज़ ढूँढ़ती है मुझे


मेरी आँखों पे दो मुक़द्दस हाथ

ये अन्धेरा भी रौशनी है मुझे


मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ

साँस लेना भी शाइरी है मुझे


इन परिंन्दों से बोलना सीखा

पेड़ से ख़ामुशी मिली है मुझे


मैं उसे कब का भूल-भाल चुका

ज़िन्दगी है कि रो रही है मुझे


मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ

पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे


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2.


तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया

इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया


यूँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ

जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया


इतना मीठा था वो ग़ुस्से भरा लहजा मत पूछ

उस ने जिस को भी जाने का कहा बैठ गया


अपना लड़ना भी मोहब्बत है तुम्हें इल्म नहीं

चीख़ती तुम रही और मेरा गला बैठ गया


उस की मर्ज़ी वो जिसे पास बिठा ले अपने

इस पे क्या लड़ना फुलाँ मेरी जगह बैठ गया


बात दरियाओं की सूरज की न तेरी है यहाँ

दो क़दम जो भी मिरे साथ चला बैठ गया


बज़्म-ए-जानाँ में नशिस्तें नहीं होतीं मख़्सूस

जो भी इक बार जहाँ बैठ गया बैठ गया



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3.


ये एक बात समझने में रात हो गई है

मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है


मैं अब के साल परिन्दों का दिन मनाऊँगा

मिरी क़रीब के जँगल से बात हो गई है


बिछड़ के तुझसे न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था

तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है


बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ' मैं ने किया

बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है


मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर

ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है


रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र

मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना'त हो गई है



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4.


पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा

मैं भीग जाऊँगा छतरी नहीं बनाऊँगा


अगर ख़ुदा ने बनाने का इख़्तियार दिया

अलम बनाऊँगा बर्छी नहीं बनाऊँगा


फ़रेब दे के तिरा जिस्म जीत लूँ लेकिन

मैं पेड़ काट के कश्ती नहीं बनाऊँगा


गली से कोई भी गुज़रे तो चौंक उठता हूँ

नए मकान में खिड़की नहीं बनाऊँगा


मैं दुश्मनों से अगर जँग जीत भी जाऊँ

तो उनकी औरतें क़ैदी नहीं बनाऊँगा


तुम्हें पता तो चले बे-ज़बान चीज़ का दुख

मैं अब चराग़ की लौ ही नहीं बनाऊँगा


मैं एक फ़िल्म बनाऊँगा अपने 'सरवत' पर

और इस में रेल की पटरी नहीं बनाऊँगा



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कराची के मशहूर पाकिस्तानी शायर सरवत हुसैन 1996 में रेल के नीचे आकर  मारे गए थे।


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5.


किसे ख़बर है कि उम्र बस उस पे ग़ौर करने में कट रही है

कि ये उदासी हमारे जिस्मों से किस ख़ुशी में लिपट रही है


अजीब दुख है हम उस के हो कर भी उस को छूने से डर रहे है

अजीब दुख है हमारे हिस्से की आग औरों में बट रही है


मैं उस को हर रोज़ बस यही एक झूट सुनने को फ़ोन करता

सुनो यहाँ कोई मसअला है तुम्हारी आवाज़ कट रही है


मुझ ऐसे पेड़ों के सूखने और सब्ज़ होने से क्या किसी को

ये बेल शायद किसी मुसीबत में है जो मुझ से लिपट रही है


ये वक़्त आने पे अपनी औलाद अपने अज्दाद बेच देगी

जो फ़ौज दुश्मन को अपना सालार गिरवी रख कर पलट रही है


सो इस तअ'ल्लुक़ में जो ग़लत-फ़हमियाँ थीं अब दूर हो रही हैं

रुकी हुई गाड़ियों के चलने का वक़्त है धुंध छट रही है



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6.


बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता

हमारे गाँव में बरसात क्यूँ नहीं करता


महाज़-ए-इश्क़ से कब कौन बच के निकला है

तू बच गया है तो ख़ैरात क्यूँ नहीं करता


वो जिस की छाँव में पच्चीस साल गुज़रे है

वो पेड़ मुझ से कोई बात क्यूँ नहीं करता


मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ

वो मेरे साथ बसर रात क्यूँ नहीं करता


मुझे तू जान से बढ़ कर अज़ीज़ हो गया है

तो मेरे साथ कोई हाथ क्यूँ नहीं करता



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7.


इक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ

ख़ुद ही आँगन ख़ुद ही शजर भी हूँ


अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ

मैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ


आसमाँ और ज़मीं की वुसअत देख

मैं इधर भी हूँ और उधर भी हूँ


ख़ुद ही मैं ख़ुद को लिख रहा हूँ ख़त

और मैं अपना नामा-बर भी हूँ


दास्ताँ हूँ मैं इक तवील मगर

तू जो सुन ले तो मुख़्तसर भी हूँ


एक फलदार पेड़ हूँ लेकिन

वक़्त आने पे बे-समर भी हूँ



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8.


जब उसकी तस्वीर बनाया करता था

कमरा रँगों से भर जाया करता था


पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे

मैं जँगल में पानी लाया करता था


थक जाता था बादल साया करते-करते

और फिर मैं बादल पे साया करता था


बैठा रहता था साहिल पे सारा दिन

दरिया मुझ से जान छुड़ाया करता था


बिन्त-ए-सहरा रूठा करती थी मुझ से

मैं सहरा से रेत चुराया करता था



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9.


इस एक डर से ख़्वाब देखता नहीं

जो देखता हूँ मैं वो भूलता नहीं


किसी मुण्डेर पर कोई दिया जिला

फिर इस के बाद क्या हुआ पता नहीं


मैं आ रहा था रास्ते मैं फूल थे

मैं जा रहा हूँ कोई रोकता नहीं


तिरी तरफ़ चले तो उम्र कट गई

ये और बात रास्ता कटा नहीं


इस अज़दहे की आँख पूछती रही

किसी को ख़ौफ़ आ रहा है या नहीं


मैं इन दिनों हूँ ख़ुद से इतना बे-ख़बर

मैं बुझ चुका हूँ और मुझे पता नहीं


ये इश्क़ भी अजब कि एक शख़्स से

मुझे लगा कि हो गया हुआ नहीं



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10.


कुछ ज़रूरत से कम किया गया है

तेरे जाने का ग़म किया गया है


ता-क़यामत हरे-भरे रहेंगे

इन दरख़्तों पे दम किया गया है


इस लिए रौशनी में ठण्डक है

कुछ चराग़ों को नम किया गया है


क्या ये कम है कि आख़िरी बोसा

उस जबीं पर रक़म किया गया है


पानियों को भी ख़्वाब आने लगे

अश्क दरिया में ज़म किया गया है


उन की आँखों का तज़्किरा कर के

मेरी आँखों को नम किया गया है


धूल में अट गए हैं सारे ग़ज़ाल

इतनी शिद्दत से रम किया गया है



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11.


न नींद और न ख़्वाबों से आँख भरनी है

कि उस से हम ने तुझे देखने की करनी है


किसी दरख़्त की हिद्दत में दिन गुज़ारना है

किसी चराग़ की छाँव में रात करनी है


वो फूल और किसी शाख़ पर नहीं खुलना

वो ज़ुल्फ़ सिर्फ़ मिरे हाथ से सँवरनी है


तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ

समुन्दरों से अकेले में बात करनी है


हमारे गाँव का हर फूल मरने वाला है

अब उस गली से वो ख़ुश्बू नहीं गुज़रनी है


तिरे ज़ियाँ पे मैं अपना ज़ियाँ न कर बैठूँ

कि मुझ मुरीद का मुर्शिद 'उवैस-क़रनी' है



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12.


हम एक उम्र इसी ग़म में मुब्तिला रहे थे

वो सानहे ही नही थे जो पेश आ रहे थे


इसीलिए तो मेरा गाँव दौड़ में हारा

जो भाग सकते थे बैसाखियाँ बना रहे थे


मैं घर में बैठ के पढता रहा सफ़र की दुआ

और उनके वास्ते जो मुझसे दूर जा रहे थे


मैं जानता हैं तू उस वक़्त भी नही था वहां

ये लोग जब तेरी मौजूदगी मना रहे थे


वो काफ़िला तेरी बस्ती में रात क्या ठहरा

हर इक को अपने पसंदीदा ख़्वाब आ रहे थे


बगैर पूछे ब्याहे गए थे हम दोनों

क़बूल कहते हुए होंट थरथरा रहे थे




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13.


अजीब ख़्वाब था उसके बदन में काई थी

वो इक परी जो मुझे सब्ज़ करने आई थी


वो इक चराग़-कदा जिस में कुछ नहीं था मेरा

वो जल रही थी वो क़िन्दील भी पराई थी


न जाने कितने परिन्दों ने इस में शिरकत की

कल एक पेड़ की तरक़ीब-ए-रू-नुमाई थी


हवाओ, आओ मिरे गाँव की तरफ देखो

जहाँ ये रेत है पहले यहाँ तराई थी


किसी सिपाह ने ख़ेमे लगा दिए है वहाँ

जहाँ ये मैं ने निशानी तिरी दबाई थी


गले मिला था कभी दुख भरे दिसम्बर से

मिरे वजूद के अन्दर भी धुन्द छाई थी


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14.


तू ने क्या क़िन्दील जला दी शहज़ादी

सुर्ख़ हुई जाती है वादी शहज़ादी


शीश-महल को साफ़ किया तिरे कहने पर

आइनों से गर्द हटा दी शहज़ादी


अब तो ख़्वाब-कदे से बाहर पाँव रख

लौट गए हैं सब फ़रियादी शहज़ादी


तेरे ही कहने पर एक सिपाही ने

अपने घर को आग लगा दी शहज़ादी


मैं तेरे दुश्मन लश्कर का शहज़ादा

कैसे मुमकिन है ये शादी शहज़ादी



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15.


सहरा से आने वाली हवाओं में रेत है

हिजरत करूँगा गाँव से गाँव में रेत है


ऐ क़ैस तेरे दश्त को इतनी दुआएँ दीं

कुछ भी नहीं है मेरी दुआओं में रेत है


सहरा से हो के बाग़ में आया हूँ सैर को

हाथों में फूल हैं मिरे पाँव में रेत है


मुद्दत से मेरी आँख में इक ख़्वाब है मुक़ीम

पानी में पेड़ पेड़ की छाँव में रेत है


मुझसा कोई फ़क़ीर नहीं है कि जिस के पास

कश्कोल रेत का है सदाओं में रेत है


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16.


चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें

दिल पे आँखें रक्खें तेरी साँसें देखें


सुर्ख़ लबों से सब्ज़ दुआएँ फूटी हैं

पीले फूलों तुम को नीली आँखें देखें


साल होने को आया है वो कब लौटेगा

आओ खेत की सैर को निकलें कूजें देखें


थोड़ी देर में जँगल हम को आक़ करेगा

बरगद देखें या बरगद की शाख़ें देखें


मेरे मालिक आप तो सब कुछ कर सकते हैं

साथ चलें हम और दुनिया की आँखें देखें


हम तेरे होंटों की लर्ज़िश कब भूले हैं

पानी में पत्थर फेंकें और लहरें देखें



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और अब उनके कुछ शेर


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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है ?  मुहब्बत-मुहब्बत बड़ा जानते हो ?

तो फिर ये बताओ कि तुम उसकी आँखों के बारे में क्या जानते हो ?


ये जुगराफ़िया, फ़लसफ़ा, साइकोलॉजी, साइंस, रियाज़ी वगैरा

ये सब जानना भी अहम है, मगर उसके  घर का पता जानते हो ?




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1 Comments

  1. पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा
    मैं भीग जाऊँगा छतरी नहीं बनाऊँगा

    Heart Touching
    https://wishmessage.com/happy-wednesday-wishes/

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